Sad Shayari

Sad Shayari
लब्ज़ कब से बैठें हैं जाने लबों पे,,
तू लौट आये तो इंतज़ार खत्म हो.....

चेहरे सी रखना वफ़ा तु दिल में भी,,
ज़हन में ना तेरे अब कोई सितम हो....

रंग-ए-ज़ख़्म पड़ जाये फ़ीका,,
बताना ग़र ऐसी कोई मरहम हो....

जो तू देगा मंजूर होगी सजा मुझको,,
सिवाय मुहब्बत ग़र मेरा कोई जुर्म हो.....

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Sad Shayari




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