तुम क्या हो कभी मालूम करके देखना,,,
खुद को कभी तुम मेरी नजर से देखना.....
खुद को कभी तुम मेरी नजर से देखना.....
जमीं पर चाँद उतर सकता है या नही,,,
आईने के सामने कभी तुम बैठ कर देखना.....
आईने के सामने कभी तुम बैठ कर देखना.....
इबादत क्या है,ख़ुदा कौन है मेरी नज़र में,,,
मेरी नजरों में कभी तुम झाँक कर देखना.....
मेरी नजरों में कभी तुम झाँक कर देखना.....
ढूंढ़ता रहता हूं बहाने तेरी तारीफ़ के बस,,,
ग़ज़ल-ए-रतनम कभी तुम पढ़ कर देखना.....
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